




सोनभद्र। श्री राम मंदिर ट्रस्ट की सीईओ की रेस में सबसे आगे चल रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे का सोनभद्र से गहरा नाता रहा है। कुख्यात अपराधी श्री प्रकाश शुक्ला समेत 80 कुख्यात अपराधियों का एनकाउंटर करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे ने अपनी पुलिस की पहली नौकरी सोनभद्र से ही शुरू की थी। इतना ही नहीं इसी जिले से अपने 80 एनकाउंटर के सफर की शुरुआत भी उन्होंने यही से की थी।5 जून 1961 को बारा, प्रयागराज में जन्मे राजेश पाण्डेय ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से 1982 में वनस्पति विज्ञान में एमएससी की है। एमएससी करने के बाद उन्होंने अपनी पहली नौकरी वर्ष 1994 में आईएआरआई पूसा इंस्टीट्यूट में बतौर रिसर्च एसोसिएट के तौर पर शुरू की थी। वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर चयनित हुए।
सोनभद्र से श्रीराम मन्दिर ट्रस्ट का सफर
पुलिस प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग के बाद राजेश पांडे की पहली नियुक्ति सोनभद्र जिले में ही हुई। उस जमाने मे इंटरनेट तो दूर, इलाके में फोन भी नहीं हुआ करते थे पुलिस ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत राजेश पांडे जब सोनभद्र में अपनी जॉइनिंग करने आए तो उसे जमाने में फोन की भी सुविधा नहीं हुआ करती थी जिसके कारण बस स्टैंड से बस से उतरने के बाद उन्हें कुछ दूरी पर स्थित कोतवाली में पैदल जाकर अपनी जॉइनिंग करनी पड़ी थी। आज श्री राम मंदिर ट्रस्ट की रेस में सबसे आगे होने की वजह राजेश पांडे की ईमानदारी, सहृदयता और बेखौफ पुलिस अधिकारी का होना सबसे अहम खूबियां बताई जा रही हैं बताते चलें श्री राजेश पांडे 2021 में आईजी पोस्ट से रिटायर होने के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस वे और यूपीआईडी के नोडल सुरक्षा अधिकारी के रूप में प्रदेश सरकार को अपनी सेवाएं दे चुके हैं राजेश पांडे की गिनती उत्तर प्रदेश के उन अधिकारियों में हुआ करती है जिन्होंने उत्तर प्रदेश में एसटीएफ की स्थापना में महत्वपूर्ण रोल निभाया था इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया डॉन श्री प्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर करने वाली टीम में राजेश पांडे भी शामिल थे इतना ही नहीं 2005 के अयोध्या आतंकी हमले और 2006 के वाराणसी दशा समय बम ब्लास्ट के जांच अधिकारी भी श्री राजेश पांडे ही थे राजेश पांडे ने अपने जीवन काल में 80 से अधिक एनकाउंटर कर प्रदेश से माफिया व गुंडों का राज समाप्त करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
दुर्गम इलाके से शुरू की अपनी पुलिस नौकरी
राजेश पांडे ने अपने पुलिस सेवा के शानदार कैरियर की पहली जॉइनिंग 1 दिसंबर 1990 को सोनभद्र में की। जिले में अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद जब राजेश पांडे को दुद्धी में पुलिस उपाधीक्षक की जिम्मेदारी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री केएनडी द्विवेदी ने दी तो उसे जमाने में समूचे इलाके में कोई संचार की सुविधा नहीं होती थी। तीन थानों वाली उनकी सर्किल में पूरे दूधी कस्बे में कोई फोन तक नहीं था पुलिस के लोगों महत्वपूर्ण बात करने के लिए वहां से 30 किलो 30 40 -50 किलोमीटर दूर हिंडालको जाना पड़ता था। जहां घंटो इंतजार के बाद अधिकारियों या लखनऊ में किसी से बात हो पाया करती थी। बाद में 4 मई 1998 को एडीजी अजयराज शर्मा ने जब कुख्यात और दुर्दांत अपराधियों के खात्मे के लिए एसटीएफ की स्थापना की तो उस टीम में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2005 में भारतीय पुलिस सेवा में प्रोन्नत होने के बाद राजेश पाण्डेय ने उसी साल हुए अयोध्या पर आतंकी हमले, 2006 में वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाने समेत तमाम महत्वपूर्ण कार्य किया। वर्ष 2021 में सेवानिवृत्ति के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस वे और यूपीडा के मुख्य सुरक्षा अधिकारी के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी सेवाएं दी है
जीवन का पहला एनकाउंटर विधायक के भाई का ।
यह बात उन दिनों की है जब सोनभद्र में अपनी तैनाती के कुछ दिनों के बाद राजेश पांडे अपनी पत्नी के साथ अपनी सर्किल दुद्धी कस्बा स्थित सरकारी आवास में रहा करते थे। वर्ष 91 में चुनाव की घोषणा हो चुकी थी और प्रचार चल रहे थे। उन्ही दिनों राजेश पांडे के घर पर कुछ आदिवासी और स्थानीय लोगों की भीड़ आई और उन्होंने उन्हें रोते हुए बताया कि दुद्धी विधायक विजय सिंह गौड़ का एक बड़ा भाई है जो बड़ा ही दबंग,अपराधी और दुराचारी है वह प्रतिदिन छोटी बच्चियों या किसी भी महिला के साथ दुष्कर्म या गंदी हरकतें किया करता है और दबंग होने के नाते कोई उसका विरोध नहीं करता। राजेश पांडे ने जब इसकी तहकीकात अपने दुद्धी इंस्पेक्टर और अन्य विभागीय लोगों से की तो सबने पुलिसिया अंदाज में चुनाव का समय होने उसके आदतन दबंग और मुकदमें लिखे अपराधी होने का हवाला देकर उन्हें इस पचड़े में ना पढ़ने की सलाह दी। कुछ दिनों के बाद जब राजेश पांडे ने अपने स्तर से इसकी सच्चाई जानने के बाद उस अपराधी को देखने की मंशा जाहिर की। एक दिन उनके चालक ने सूचना दी कि अपराधी देव किशुन गोंड कनहर नदी पार करके दूसरी तरफ गया है। राजेश पांडे से आनन फानन में पुलिस टीम लेकर घेराबंदी की तो विंधमगंज कस्बे के आसपास मुठभेड़ हो ही गई और इस मुठभेड़ में देवकिशन गोंड मारा गया। गया बाद में कस्बे के लोगों ने पुलिस उपाधीक्षक की दिल से तारीफ की लेकिन तत्कालीन पुलिस अधीक्षक केएनडी द्विवेदी ने राजेश पांडे को बहुत ही डांट लगाई। राजेश पांडे के एनकाउंटर का सफर जो सोनभद्र से शुरू हुआ वह अनवरत चलता ही रहा और इसमें श्री प्रकाश शुक्ला और न जाने कितने गैंगस्टर और अपराधियों की नाम जुड़े।
