

सोनभद्र। बीएसपी के इकलौते विधायक बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार 5 अगस्त 2026 को निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे और दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के एकमात्र विधायक थे।
बहुजन समाज पार्टी में एक अच्छी खासी हैसियत रखने वाले पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह का निधन बसपा के लिए बहुत बड़ी राजनीतिक क्षति बताई जा रही है।
सैनिक पुत्र उमाशंकर ने कमाई दौलत व शोहरत
बलिया जिले के खनवर में 2 जनवरी 1971 में पूर्व सैनिक रह चुके घुरहू राम के घर जन्मे उमाशंकर सिंह ने सतीश चन्द्र डिग्री कॉलेज में छात्र संघ के चुनाव के बाद ठेकेदारी का काम शुरू किया। बलिया और आजमगढ़ में सड़क निर्माण का काम करने के बाद उमाशंकर सोनभद्र में आये और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में सड़क निर्माण का ठेका मिलेने के बाद उमाशंकर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने तीन साथियों के साथ शुरू की गयी उनकी कंपनी छात्र शक्ति इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड आज हजारो करोड़ की कंपनी है और देश के तमाम हिस्सो में बड़े निर्माण कार्य कर रही है। हालांकि बसपा सरकार में इनकी कंपनी पर पत्थर खनन के पट्टे हासिल करने के तमाम आरोप लगे लेकिन कंपनी की तरक्की कभी कम न हो सकी।अपनी विधानसभा में एक साथ 351निर्धन कन्याओ की बड़े ही धूमधाम से सामूहिक विवाह करा कर उमाशंकर सिंह ने खूब लोकप्रियता हासिल की थी। उनका परिवार खाकी बाबा सेवा समिति के नाम से समाज सेवा के क्षेत्र में अपने आसपास के इलाके में काफी परोपकारी काम करता रहा है।
सोनभद्र से मिली पहचान,हैसियत और रुतबा
2002 में सोनभद्र में जब उन्हें एक सड़क का ठेका मिला तो उनके पास एक टिपर एक अम्बेसडर एक मोटरसाइकिल और चंद लोग थे उमाशंकर सिंह के करीबी सहयोगी भूपेंद्र सिंह,पंकज सिंह,गणेश तिवारी उन चुनिदा लोगों में रहे जो शुरुआती दौर में उनके साथ कारोबार में जुड़े। उमाशंकर सिंह ने सोनभद्र में ही दो अन्य साथियों ने मिलकर छात्र शक्ति इन्फ्रास्ट्रक्शन कंपनी के नाम से कंपनी का गठन किया और धीरे-धीरे सरकारी ठेकों में अपनी पकड़ बनाने शुरू की। वर्ष 2007 में जब बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनी तो उमाशंकर सिंह की गिनती सूबे के बड़े ठेकेदारों में होने लगी हालांकि बड़े निर्माण का अनुभव न होने के बावजूद भी उन्हें अब बड़े बड़े टेण्डर मिलने लगे थे जिसके पीछे राजनीतिक रसूख के लोगों का वरदहस्त होना बताया जाता था। बसपा सरकार में ही उनकी कंपनी को खनन के पट्टे भी आवंटित हुए। 2012 में अपने कुशल व्यवहार व रसूख के चलते बलिया के रसड़ा विधानसभा सीट से निर्दल विधायक निर्वाचित होकर उमाशंकर ने राजनीति में कदम रखा।
फायर ब्रांड नेता को हरा पहुंचे विधानसभा
भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड विधायक राम इकबाल सिंह को पटखनी देकर 16 वी विधानसभा में पहुचने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती के काफी करीब आये और उनके विश्वसनीय लोगों में उमाशंकर सिंह का नाम लिया जाने लगा। वर्ष 2014 में केन्द्र में भाजपा के आने के बाद भी उमाशंकर के कारोबार व रसूख में कोई फर्क नही पड़ा बल्कि तरक्की ही हुई। 2017 में एक बार फिर विधानसभा जीत कर अपनी योग्यता साबित की और पार्टी में मजबूती बनाये रखी। केन्द्र और प्रदेश दोनों जगह भाजपा शासन होने के बावजूद भी उमाशकर सिंह के कारोबार में कोई अंतर न आने के पीछे उनकी बसपा सुप्रीमो मायावती से नजदीकियां ही रहीं। जानकर यह भी बताते है कि मायावती के भाजपा के लिये नरमी की वजह उमाशंकर सिंह ही हुआ करते हैं और यही कारण रहा कि उनकी कंपनी साल दर साल तरक्की करती रही। वर्ष 2022 में बसपा के एकमात्र विधायक चुने जाने के साथ ही बसपा की विधानसभा में लाज बचाने का काम उमाशंकर सिंह ने किया।हालांकि इसी वर्ष फरवरी में उनके व्यावसायिक ठिकानों व आवास पर आयकर विभाग के छापे भी पड़े थे।इन छापों में ओबरा खनन क्षेत्र की पत्थर खादान व जिला मुख्यालय स्थित उनका ऑफिस भी निशाने पर रहा।
सदस्यता गयी और बहाल भी हुई 2017 में
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह पर चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देकर सरकारी ठेके हासिल करने के आरोप वर्ष 2016 के अंत में लगे।आरोपो के कारण उनको अपनी सदस्यता से हाथ भी धोना पड़ा लेकिन माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उनकी सदस्यता एक बार पुनः बहाल हो गयी थी।
