पितरों की शांति हेतु सततवाहिनी नदी तट पर पितृ विसर्जन, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा तट।

विरेन्द्र कुमार

विंढमगंज सोनभद्र पितृपक्ष के अंतिम दिन शनिवार को क्षेत्र की जीवनदायिनी सततवाहिनी नदी के तट पर पितृ विसर्जन का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही नदी तट पर श्रद्धालुओं पहुंचे।
सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर दर्जनों परिवार अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए सततवाहीनी नदी के तट पर पहुंचे। पुरोहित राजु रंजन तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान, तर्पण, पितृ पूजन और विसर्जन की विधि संपन्न कराई गई। श्रद्धालुओं ने जौ के आटे, जौ, तिल,अक्षत से बने पिंडों का दान कुश के साथ कर अपने पूर्वजों को नमन किया।
मान्यता है कि नदी के पवित्र जल में पितृ विसर्जन करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। विसर्जन के बाद श्रद्धालुओं ने नदी में पुर्वजों के मोक्ष के लिए किए पींड,जलते दिये को प्रवाहित कर सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना की।