


डाला में रैली के दौरान दो घंटे हाईवे वन-वे, जाम और बुलडोजर से नुकसान ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
खनन क्षेत्र से मंगाए गए दो दर्जन से अधिक बुलडोजर से हुआ स्वागत, रैली के बाद लोडर की बैक करने में हाईवे किनारे की सुरक्षा दीवार गिरी—दो बाइक क्षतिग्रस्त
डाला। डाला रामलीला मैदान में आयोजित सेवा संकल्प अभियान की रैली के दौरान सोमवार को यातायात व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। बताया गया कि रैली में फूल वर्षा से स्वागत के लिए खनन क्षेत्र से लगभग दो दर्जन से अधिक बुलडोजर/लोडर मंगाए गए थे। इस दौरान वाराणसी-शक्तिनगर स्टेट हाईवे पर दोपहर करीब 3 बजे से शाम 6 बजे तक यातायात को वन-वे किए जाने से सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही।
रैली समाप्त होने के बाद वाहनों की आवाजाही के दौरान एक लोडर के पीछे करने पर हाईवे किनारे लगी दीवार गिर गई। दीवार की चपेट में आने से दो बाइक क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत रही कि घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
तीन घंटे हाईवे प्रभावित, मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी पर सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार रैली के दौरान काफी समय तक हाईवे पर यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। मौके पर पर्याप्त पुलिस बल दिखाई नहीं देने की बात भी सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े आयोजन और हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही के बीच यातायात नियंत्रण तथा सुरक्षा की पूर्व व्यवस्था किस स्तर पर की गई थी?
क्या हाईवे को वन-वे करने की अनुमति थी?
स्थानीय स्तर पर यह जानकारी भी चर्चा में है कि हाईवे पर लगभग तीन घंटे तक यातायात व्यवस्था बदलने के लिए कोई स्पष्ट प्रशासनिक आदेश मौके पर उपलब्ध नहीं था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से होना अभी बाकी है।
यदि वास्तव में किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति अथवा यातायात डायवर्जन योजना के बिना हाईवे को लंबे समय तक वन-वे किया गया, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है। वहीं यदि अनुमति जारी हुई थी, तो उसे सार्वजनिक अथवा मौके पर तैनात अधिकारियों को उपलब्ध कराने तथा उसके अनुरूप यातायात प्रबंधन की व्यवस्था किए जाने का सवाल भी उठता है।
बुलडोजरों की भीड़ और हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बनी चर्चा का विषय
खनन क्षेत्र से बड़ी संख्या में बुलडोजर/लोडर को रैली में शामिल किए जाने और उनके हाईवे पर आवागमन के बीच हुई घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि इतने भारी वाहनों के संचालन के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग और सुरक्षा की क्या व्यवस्था निर्धारित की गई थी।
दो बाइक क्षतिग्रस्त होने की घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि उसी स्थान पर पैदल राहगीर या दोपहिया चालक मौजूद होता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। ऐसे में स्थानीय नागरिक अब प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी और यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक अनुमति, यातायात व्यवस्था और मौके पर तैनात पुलिस बल की उपस्थिति के बारे में प्रशासन के अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
